मतलब
L1 वह तकनीकी रूप से योग्य विक्रेता है जिसकी मूल्यांकित (evaluated) कीमत सबसे कम हो। रैंकिंग सिर्फ़ उन्हीं विक्रेताओं की होती है जो तकनीकी मूल्यांकन पास करते हैं, इसलिए दस्तावेज़ों में फ़ेल हुई सस्ती बिड कभी L1 नहीं बनती। बिड के हिसाब से L1 कुल मूल्य, आइटम-वार या ग्रुप-वार तय होता है, और अगर रिवर्स ऑक्शन हो तो उसके बाद। परचेज़ प्रेफ़रेंस (purchase preference) के नियमों से दूसरे विक्रेता कुछ मात्रा के लिए L1 कीमत मैच कर सकते हैं।
आसान भाषा में
L1 यानी 'Lowest 1' — क्वालीफ़ाई करने वालों में सबसे कम रेट वाला।
संबंधित शब्द
इस विषय पर गाइड
यह सामान्य जानकारी है। सही सीमा, प्रतिशत और समय-सीमा बिड दस्तावेज़ और gem.gov.in पर ज़रूर जाँचें।
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