मतलब
जब खरीदार GeM पर ऑर्डर देता है — डायरेक्ट खरीद, L1 खरीद या बिड के बाद — तो पोर्टल एक कॉन्ट्रैक्ट बनाता है, जिसमें आइटम, मात्रा, कीमत, कंसाइनी और डिलीवरी अवधि होती है। विक्रेता इसे स्वीकार करके पूरा करता है, ज़रूरत हो तो ePBG जमा करता है, डिलीवरी करता है, और CRAC के बाद बिल बनाता है। हर फ़ॉलो-अप के लिए कॉन्ट्रैक्ट नंबर संभाल कर रखें।
आसान भाषा में
कॉन्ट्रैक्ट = GeM का पक्का ऑर्डर — इसमें लिखा होता है कि क्या, कितना, कहाँ और कब तक देना है।
संबंधित शब्द
इस विषय पर गाइड
यह सामान्य जानकारी है। सही सीमा, प्रतिशत और समय-सीमा बिड दस्तावेज़ और gem.gov.in पर ज़रूर जाँचें।
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